Tuesday, October 15, 2019

66 # फौजी

वो इश्क़ ही क्या जो रोज़
लिबास सा बदला जाए
हमारा तो इश्क़ भी कफ़न सा हैं
जो एक बार चढ़े तो फिर न उतारा जाए
मजबूरियों के नाम पे जो रोज़ मरते हैं
उन्हें किस्तों की ज़िंदगी मुबारक
हम एहले वक़्त पर मरने वाले
मौत को हमरा ख़ौफ मुबारक ...

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