सूरज जलके फिर ढल गया
पर दीयों का जलना अभी बाकी हैं
आँखे बंधी हैं अब भी राहो पे
शायद कुछ परिंदों का लौटना बाकी हैं
दो चुस्की चाय में डूब गई दिन भर की थकान
आँखों में चमक होठों पे मुस्कान आनी बाकी हैं
क्या खोया क्या पाया हिसाब तो होते रहेंगे
अभी तो जिम्दारियों के क़िस्त भरना बाकी हैं
एक और दिन पहुँचा आज आपने आज़म तक
पर मंजिल तलाशती जीवन का सफ़र अभी बाकी हैं ...
पर दीयों का जलना अभी बाकी हैं
आँखे बंधी हैं अब भी राहो पे
शायद कुछ परिंदों का लौटना बाकी हैं
दो चुस्की चाय में डूब गई दिन भर की थकान
आँखों में चमक होठों पे मुस्कान आनी बाकी हैं
क्या खोया क्या पाया हिसाब तो होते रहेंगे
अभी तो जिम्दारियों के क़िस्त भरना बाकी हैं
एक और दिन पहुँचा आज आपने आज़म तक
पर मंजिल तलाशती जीवन का सफ़र अभी बाकी हैं ...
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